संग्रह

कामागाटा मारू: कंटीन्यूइंग दा जर्नी  डिजिटल संग्रह में नीचे वर्णित बहुत से भिन्न भिन्न संग्रहों में से सामग्री सम्मिलित है।

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अर्जन सिंह बराड़ संग्रह

2014 में, कामागाटा मारू की घटना के लगभग 100 साल बाद, श्री अमरजीत सिंह बराड़ और उन के परिवार ने कामागाटा मारू के समय से लेकर दक्षिण एशिआइयों के इतिहास को दर्शाते विशेष संग्रह और दुर्लभ पुस्तकों, अपने पिता के दस्तावेज़ों, स्क्रैपबुकों, डायरिओं, तस्वीरों और दूसरी विलक्षण वस्तुओं से भरा एक सूटकेस साइमन फ़्रेज़र विश्वविद्यालय को दान किया। अर्जन सिंह बराड़ आरम्भ में 1926 में कनाडा आये। प्रारंभिक दक्षिण एशिआई भाईचारे के एक सरगर्म सदस्य होते हुए, उन्होंने 1866 वेस्ट सेकंड एवेन्यू पर स्थित वैंकुवर के सबसे पहले गुरूद्वारे में खालसा दीवान सोसाइटी में बहुत सी भूमिकाएं निभाईं, और भाईचारे के धार्मिक, राजनैतिक, आर्थिक एवं सामाजिक जीवन के केंद्र में रहे।

अर्जन सिंह बराड़ की डायरी इस संग्रह का ह्रदय है। 1920 के समय में आरम्भ की गयी, यह भाईचारे के इतिहास को प्रमाणित करती है जो 1904 से आरम्भ होकर 1947 में समाप्त होता है। उनके हाथों सावधानी से कलमबद्ध की गई, यह डायरी गुरुद्वारा के एक प्रबंधक के दफ्तरी जीवन और वैंकुवर में  प्रारंभिक दक्षिण एशिआई प्रवासियों की रोज़ाना ज़िन्दगियों को प्रमाणित करते हुए एक बुद्धिमान इतिहासकार के तिथिक्रम वृत्तांत को मिश्रित करती है। गुरुद्वारा समिति के कार्य का दिन प्रतिदिन वर्णन और परोपकारी लक्ष्यों के लिए एकत्र की गई रकमों का वर्णन, इसमें सम्मिलित है, वैंकुवर में जीवन सम्बंधित किस्से कहानियाँ, और सेकंड एवेन्यू पर ऐतिहासिक गुरूद्वारे की तस्वीरें इस में सम्मिलित है। दक्षिण एशिआई दृष्टिकोण से कामागाटा मारू की घटना का वर्णन इस डायरी का मुख्य प्रकाशमय अंश है - जिस में शोर समिति की गतिविधियों, और अंततः जहाज़ के प्रस्थान तक की घटनाओं सहित जहाज़ के आगमन के प्रति भाईचारे की प्रतिक्रिया को तिथिक्रम में अंकित किया गया है।

संग्रह में सम्मिलित और बहुत सी विशेष वस्तुओं में हैं:

  • पंजाबी में कामागाटा मारू के यात्रियों की सूची का एक वैकल्पिक संस्करण
  • कामागाटा मारू के यात्रियों के वकील जे. एडवर्ड बर्ड द्वारा गुरदित सिंह और उसके पुत्र के साथ हुए बर्ड के पत्राचार से सम्बंधित खालसा दीवान सोसाइटी को लिखे गए पत्र
  • वैंकुवर में प्रारंभिक दक्षिण एशिआई इतिहास, विशेषकर कामागाटा मारू की घटना को प्रमाणित करती अखबारों की कतरनों से भरी हुईं स्क्रैपबुक्स
  • यूनाइटेड इंडिया होम रूल लीग ऑफ़ कनाडा और वैंकुवर की हिन्दुस्तानी स्वराज सभा, जिन संस्थाओं ने ग़दर आंदोलन को जन्म दिया, की मौलिक डायरी
  • भाग सिंह का पासपोर्ट, 1927
  • बी.सी. की खालसा दीवान सोसाइटी की ओर से 1942 में वोट के अधिकार के लिए दायर की गयी पेटिशन
  • सेकंड एवेन्यू के गुरुद्वारा में प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू के भाषण की 1949 की रिकॉर्डिंग

कैनेडियन फार्मवर्करज़ यूनियन संग्रह

कैनेडियन फार्मवर्करज़ यूनियन (सी ऍफ़ यू) और उसके सहयोगियों ने खेत मज़दूरों के लिए काम की बेहतर परिस्थितियों और आवास की वकालत की, कीटनाशकों के प्रभाव जैसी स्वास्थय सम्बंधित चिंताओं का समाधान किया, और कनाडा के कानूनों में निहित ऐतिहासिक भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष करते हुए सांस्कृतक और शैक्षणिक अधिकारों को बढ़ावा दिया। सी ऍफ़ यू की उत्पत्ति की जड़ें सितम्बर 1978 में सरी, ब्रिटिश कोलंबिया के एक स्कूल में दक्षिण एशिआई भाईचारे के सक्रिय प्रतिभागीयों की एक प्रारंभिक एकत्रता में ढूंढी जा सकती हैं। सी ऍफ़ यू ने अपनी नींव डालने वाला सम्मेलन 6 अप्रैल, 1980 को आयोजित किया, और उसी वर्ष जुलाई में खेत मज़दूरों की सब से पहली यूनियन का प्रमाणन प्राप्त किया। वर्ष के अंत तक, सी ऍफ़ यू लोकल 1 ने खेत मज़दूरों के लिए अपने सब से पहले ऐतिहासिक सामूहिक अनुबंध पर हस्ताक्षर कर लिए।

1980 के समय के दौरान, सी ऍफ़ यू, बी.सी. और ओंटारियो में खेत मज़दूरों के नस्ली समूहों को संगठित करने वाली एक मुख्य शक्ति बन गई। 1993 में,  बी.सी. की न्यू डेमोक्रेटिक सरकार खेतीबाड़ी कामगारों को स्वास्थय और सुरक्षा के नियमों के दायरे में ले आई - एक ऐसा बदलाव जो सी ऍफ़ यू और खेत मज़दूरों के लिए न्याय प्राप्त करने हेतु कामगारों और उपभोगताओं को एकत्र करने वाले एक बड़े सामाजिक आंदोलन द्वारा लाया गया। 2003 में खेत मज़दूरों को रोज़गार सम्बंधित बुनियादी सामान्य कानूनों से वंचित कर दिया गया और प्रति घंटा के हिसाब से अदायगी किए जाने वाले खेत मज़दूरों को सरकारी छुट्टियों का वेतन दिए जाने, फसल के न्यूनतम भाव और ओवरटाइम वेतन दिये जाने के बहुत कठिनाई से प्राप्त किये गये अधिकारों को वापस ले लिया गया।

साइमन फ़्रेज़र विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के विशेष संग्रह, दुर्लभ पुस्तक विभाग के पास उपलब्ध कैनेडियन फार्मवर्करज़ यूनियन के सम्पूर्ण अभिलेखीय संग्रह में से यहां पर 700 से अधिक प्रकाशनों, दस्तावेज़ों,  तस्वीरों,  श्रव्य रिकॉर्डिंगों,  मौखिक इतिहास साक्षात्कारों और अन्य विशेष वस्तुओं के एक प्रतिनिधिक संकलन को डिजिटल रूप दिया गया है।

डी.पी. पांडिया संग्रह

डी.पी. पांडिया संग्रह में डा. दुरई पाल पांडिया की गतिविधियों को प्रमाणित करती हुईं डिजिटल तस्वीरें, दस्तावेज़, और वस्तुएं सम्मिलित हैं। एक वकील और सक्रियतावादी, डा. पांडिया ने 1947 में दक्षिण एशिआई भाईचारे के लिए वोट का अधिकार प्राप्त करने और कनाडा में प्रवासियों के अधिकारों को बेहतर बनाने में मुख्य भूमिका निभाई। डिजिटल रूप देने के लिए इस सामग्री का योगदान उनकी पुत्री अरुणा पांडिया की ओर से दिया गया है। कोहली संग्रह में पांडिया के साथ 1974 में हुए एक साक्षात्कार की श्रव्य रिकॉर्डिंग और इस वेबसाइट के वीडियो भाग में अरुणा पांडिया के साथ एक साक्षात्कार सहित डा. पांडिया से सम्बंधित अन्य रिकॉर्ड इस वेबसाइट पर दूसरे संग्रहों में उपलब्ध हो सकते हैं।

हेनरी हर्बर्ट स्टीवन्ज़ फोंडज़

सिटी ऑफ़ वैंकुवर आर्काइव्ज़ के पास उपलब्ध हेनरी हर्बर्ट (ऍच.ऍच.) स्टीवन्ज़ फोंडज़ में से बहुत सी सम्पूर्ण फाइलों की सामग्री को यहां पर डिजिटल रूप दिया गया है: "हिन्दू इमीग्रेशन", "कामागाटा मारू", "हिन्दू फ्रैंचाईज़; इमीग्रेशन", "इमीग्रेशन; वैंकूवर पोर्ट फैसिलिटीज", और "न्यूज़ क्लिपिंग्ज़"

स्टीवन्ज़ कनाडा में एशिआई प्रवास का विरोधी था और कामागाटा मारू की घटना के समय वैंकुवर से सदन का कंज़र्वेटिव सदस्य था। कामागाटा मारू से विशेषकर और एशिआई प्रवास से सामान्य रूप से सम्बंधित इस रिकॉर्ड में पत्राचार, रिपोर्टें, नोट और अन्य दस्तावेज़ सम्मिलित हैं जो कि स्टीवन्ज़ और प्रधान मंत्री रोबर्ट बोर्डेन जैसे सरकारी अधिकारियों, मेलकॉम रीड और विलियम हॉप्किंसन सहित प्रवासीय विभाग के अधिकारीयों, गुरदित सिंह और डा. रघुनाथ सिंह जैसे यात्रियों, और उनके वकील जे. एडवर्ड बर्ड सहित उस घटना के बहुत से मुख्य खिलाड़ियों द्वारा बनाये गए हैं या उन से सम्बंधित हैं। इन फाइलों में अदालती प्रतिलिपियां, बोर्ड की कार्यवाहियों का लिखित ब्योरा, डोमिनियन हॉल पर हुई बैठकों का लिखित ब्योरा, और स्टीवन्ज़ द्वारा स्थानीय समाचारपत्रों में से कामागाटा मारू से सम्बंधित एकत्र की गईं कतरनों की एक फाइल भी सम्मिलित है। इस संपूर्ण घटना को इन रिकॉर्डों में फ़ेडरल सरकार के एक स्थानीय अधिकारी के दृष्टिकोण से प्रमाणित किया गया है। 

ह्यूग जांस्टन कामागाटा मारू खोज संग्रह

अपनी पुस्तक द वॉयेज ऑफ़ द कोमागाटा मरू के लिए खोज करते समय ह्यूग जांस्टन द्वारा एकत्र की गयी खोज सामग्री के 3000 से अधिक पन्ने इस संग्रह में सम्मिलित हैं। पब्लिक आर्काइव्ज़ ऑफ़ कनाडा (लाइब्रेरी एंड आर्काइव्ज़ कनाडा), नेशनल आर्काइव्ज़ ऑफ़ इंडिया, यू.एस. नेशनल आर्काइव्ज़ एंड रिकॉर्डज़ एडमिनिस्ट्रेशन, और सिटी ऑफ़ वैंकुवर आर्काइव्ज़ से दस्तावेज़ों की नकलें भी सम्मिलित हैं जो प्राय जांस्टन की टिप्पणियों के साथ हैं। इन रिकॉर्डों में विशेषकर प्रवासीय विभाग के लिए काम करने वाले सरकारी अधिकारियों का पत्राचार और रिपोर्टें, अदालती रिकॉर्ड, बोर्ड की कार्यवाहियों का लिखित ब्योरा और पत्रिकाओं की प्रतिलिपियाँ एवं समाचारपत्रों की कतरनें शामिल हैं। 

इंडो-कैनेडियन मौखिक इतिहास संग्रह

साइमन फ़्रेज़र विश्वविद्यालय के पुरालेख विभाग की ओर से यह संग्रह कनाडा में आकर बसने वाले प्रारंभिक दक्षिण एशिआईयों से साक्षात्कार करने के दो अलग अलग प्रोजेक्टों पर आधारित है जिन में लगभग यह सभी ब्रिटिश कोलंबिया के निवासी हैं। साइमन फ़्रेज़र विश्वविद्यालय में सामाजिक शास्त्र के प्रोफेसर एमेरिटस, डा. हरी शर्मा ने भारत के पंजाब प्रान्त के उन प्रवासियों के इतिहास को लिखित रूप देने के एक प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया जो 1912 और 1938 के बीच कनाडा में आए। यह साक्षात्कार    डा. हरी शर्मा और उन के स्नातक विद्यार्थियों द्वारा 1984 और 1987 के बीच किए गये। इन साक्षात्कारों को 1 से 19 तक का क्रमांक दिया गया है। एक दूसरे प्रोजेक्ट में उन सिख प्रवासियों के साथ 32 साक्षात्कार शामिल हैं जो 1956 से पूर्व कनाडा में आए। यह प्रोजेक्ट डा. गुरचरण सिंह बसरां और  डा. बी. सिंह बोलारिया द्वारा 1986 में संचालित किया गया। इन साक्षात्कारों को 20 से 52 तक का क्रमांक दिया गया है।

यह साक्षात्कार कनाडा में प्रवास के कारणों और उन के कनाडा में प्रवेश की शर्तों और नियमों की व्याख्या करते हैं। साक्षात्कार देने वाले एक बार कनाडा में आ जाने पर काम और रहने के बारे में अपने अनुभवों की चर्चा करते हैं; श्रम, क़ानूनी और राजनैतिक मुद्दे जो प्रवासियों को प्रभावित करते थे; अन्य जातीय एवं नस्ली समूहों से संबंध; पारिवारिक जीवन और कनाडा के समाज के साथ सामंजस्य; एवं अपने मूल देश के साथ निरंतर सम्पर्क। लगभग सभी साक्षात्कार पंजाबी में किए गये हैं जब कि थोड़े से अंग्रेज़ी और हिंदी में हैं। 

उपयोगिता बढ़ाने हेतु,  संग्रह में अंग्रेजी और फ्रांसीसी में और कुछ मामलों में पंजाबी में भी खोज योग्य सारांश या सम्पूर्ण प्रतिलिपियाँ शामिल हैं। आज के ब्रिटिश कोलंबिया निवासियों को इन आरंभिक निवासीयों के बहुत से अनुभवों का ज्ञान नहीं है: नागरिकता के अधिकारों का अभाव; औरतों को दाखिले से मनाही; पगड़ी पहनने और ग़ैर-पश्चिमी परिधान पर प्रतिबन्ध। समग्र रूप में, यह संग्रह दक्षिण एशिआई प्रवासियों की सब से पहली पीढ़ी के संसार की उन्हीं के शब्दों में एक अपूर्व झलक प्रस्तुत करता है।

कोहली संग्रह

साइमन फ़्रेज़र विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के विशेष संग्रह, दुर्लभ पुस्तक विभाग के पास उपलब्ध कोहली संग्रह में से ब्रिटिश कोलंबिया में आरम्भिक दक्षिण एशिआई भाईचारे को प्रमाणित करती बहुत सी तस्वीरों और पत्रिकाओं को यहां पर डिजिटल रूप दिया गया है। ब्रिटिश कोलंबिया में सब से पहले गुरद्वारों में भाईचारे के सदस्यों के चित्र शामिल हैं, जिन में वैंकुवर, विक्टोरिया, हिलक्रेस्ट और ओशनफॉल के गुरद्वारे सम्मिलित है; 1897 में महारानी विक्टोरिया की जयन्ती के पश्चात बी. सी. में सिख रेजिमेंट;  लंबर मिल कामगार और उन के परिवार; विक्टोरिया में हिरासत केंद्र में पनामा मारू के यात्री; 1915 में मेवा सिंह की शवयात्रा; भाईचारे के अगुआ; जवाहर लाल नेहरू सहित राजनैतिक नेताओं के दौरे।