कनाडावासी की बदलती पहचान

बारी बरसी खटन गया सीखटके ले आंदा...

("मैंने बाराह सालों तक घर से दूर सफर कियाऔर इस सफर के बाद में घर लाया...")

एक प्रकार के लोकप्रिय पंजाबी लोकगीत की प्रारंभिक पंक्तियाँ

एक जगह से ज़्यादा के साथ सांकृतिक जुड़ाव बनाए रखना कनेडियन बहुसंस्कृतिवाद (मल्टीकल्चरलिज़्म) की विशेषता है। ग़ैर

-यूरोपीय आव्रजन को कनाडा जिस नज़र से देखता आया थाइसमें पिछली सदी के दौरानज़बरदस्त तरीके से बदलाव आया है। इस बदलाव में कनाडा में आ रहे बदलावों और दुनिया भर में चल रहीं गतिविधियों की झलक मिलती है। सरकारी नीतियों में लाये गये एतिहासिक बदलावों के ज़रिये, प्रथम बसने वाली बिरादरी के प्रारंभिक संघर्ष को समाधान मिले। इन बदलावों में शामिल हैं साउथ एशियन प्रवासियों का १९४७ में मताधिकार फिर प्राप्त करना और देर १९६० में आव्रजन कानूनों में बदलाव लाना। ऐसे बड़े परिवर्तन आरंभिक सक्रियतावादियों के अनथक काम का नतीजा थे जिन्होंने नयी मातृभूमीयों के साथ रिश्तों की डोर बांधी और अपने नए घरों को संवारने के लिए साथ कुछ नया लेकर आये।

लेकिन इक कनाडावासी होने का क्या मतलब हैक्या कनेडियन होने की धारणा समय के साथ बदल जाती हैक्या कोई ऐसे "मूल सिद्धांतहैं जिनपर हम एकमत हो सकते हैंया क्या ऐसा मुम्किन है कि जहाँ इतिहास पर सहमती न मिलेवहाँ उसकी जगह बातचीत और विचार-विमर्श ले ले जिससे नए और ज़्यादा गहरे रिश्ते बनाए जा सकेंयहाँ आपको पिछले १०० सालों के दौरानकनेडियन होने की कई परिभाषाएं मिलेंगी। कुछ लोग नसल और मौसम के बारे में बताते हैंकुछ और सामाजिक विकास या साझी मान्यताओं के बारे में कहते हैं। इस बातचीत के आकार को टटोलते और समय दौरान आये परिवर्तन(या अपरिवर्तितको देखतेहमें ऐसा माहौल मिलता है जहाँ हम कनाडा को देखने और इक कनेडियन होने के अलग-अलग पहलुओं-ज़रियों को तलाश सकते हैं।